Verse 1प्रभु मैं ख़ुद को
तेरे क़रीब लाऊँ
और तेरे नाम को
धन्य कहूँ।
Verse 2तू ही योग्य है
आदर के योग्य है
महिमा मिले तुझे
और आराधना भी
Verse 3तूने ही तो प्रभु, मुझे मेरे पापों से
क्रूस की मौत के द्वारा, बचा लिया।
तूने मेरे जीवन में, एक नयी आशा देकर
अपने स्वर्ग राज्य का, वारिस बना लिया।
Verse 4मेरे धन्यवाद की भेंट, तेरे सन्मुख प्रभु
पूरे तन मन से मैं, तुझको चढ़ाता हूँ
मेरा सब कुछ प्रभु, मैं तुझे देता हूँ
अपने इस जीवन को भी, तुझको मैं सौंपता हूँ।