Verse 1प्रार्थना को सुनने वाले प्रभु,प्रार्थना कि चाहत हम में तू भर,
प्रार्थना में सदा ठहरे रहे,
प्रार्थना का गौरव पाते रहे|
Verse 2प्रार्थना ही जीवन, प्रार्थना ही जय,
जीने के लिए नियम यह है (2)
Verse 3उत्साह के साथ और एकता के साथ,
प्रतिज्ञाओ को हम पायेंगे,
सच्चे विचारों पर अटल रहे,
प्रार्थना के लिए अनुग्रह दे |
Verse 4सदैव ही प्रार्थना करने हेतू
सारी रुकावटें कर दे तू दूर,
दुर्बल शरीर पर जय पाने को
आत्मा उंड़ेलकर अग्निमय कर |